फेसबुक की मैसेजिंग सर्विस मैसेंजर में भी अब जल्द ही एक नया फीचर आने वाला है, जिसकी मदद से यूजर्स भेजे गए मैसेज को 10 मिनट के अंदर डिलीट कर सकेंगे। दरअसल, आईओएस के लिए हाल ही में फेसबुक ने मैसेंजर का नया वर्जन 191.0 रिलीज किया है, इस वर्जन में कंपनी ने इस नए फीचर के जल्द आने की बात कही है।
फेसबुक ने अपने नोट में लिखा है कि अगर कोई यूजर गलती से कोई मैसेज, फोटो या कोई जानकारी किसी गलत चैट में भेज देता है, तो मैसेज भेजने के 10 मिनट के अंदर उसे डिलीट किया जा सकेगा।
व्हाट्सऐप की तरह ही काम करेगा ये फीचर : व्हाट्सऐप में काफी समय पहले से ही भेजे गए मैसेज को डिलीट करने का फीचर है। इस फीचर की मदद से जो भी मैसेज डिलीट किया जाता है, वो सेंडर और रिसीवर दोनों के ही इनबॉक्स से डिलीट हो जाता है। फेसबुक में भी इसी तरह का फीचर रहेगा। 10 मिनट के अंदर जैसे ही भेजे गए मैसेज को डिलीट किया जाएगा तो वो सेंडर और रिसीवर दोनों के ही इनबॉक्स से हट जाएगा।
व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम में पहले से ही है ये फीचर : फेसबुक के ऑनरशिप वाली व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम दोनों में ही भेजे गए मैसेज को डिलीट करने का ऑप्शन मिलता है। व्हाट्सऐप में जहां 'Delete For Everyone' नाम से ये फीचर है वहीं इंस्टाग्राम में 'Unsend' के नाम से ये फीचर मिलता है।
एक युवक की फेसबुक आईडी हैक कर उससे युवतियों को अश्लील वीडियो भेजने वाले आरोपी को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। आराेपी ने बदला लेने की नीयत से आईडी हैक की थी। वह प्राइवेट कंपनी में सेल्स मार्केटिंग का काम करता था।
एएसपी क्राइम ब्रांच अमरेंद्रसिंह ने बताया आरोपी सतीश (33) पिता वृंदावन रायकवार निवासी राम नगर मूसाखेड़ी है। मिंकू वर्मा निवासी पंचशील नगर न्यू लोहा मंडी ने शिकायत की थी कि किसी ने उनकी फेसबुक आईडी हैक कर ली है। वह उनके फेसबुक प्रोफाइल में शामिल महिलाओं को अश्लील मैसेज व वीडियो भेज रहा है। उन्हें इसका पता तब चला जब उनकी दोस्तों ने इस प्रकार के वीडियो भेजने पर आपत्ति जताते हुए कहासुनी की। क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ा।
आरोपी सतीश ने बताया कि उसने फेसबुक पर यूजर नेम व पासवर्ड की जगह मिंकू का मोबाइल नंबर लिखा था। इससे मिंकू की प्रोफाइल खुल गई और महिलाओं को अश्लील वीडियो भेजने लगा। आरोपी ने बताया उसने मिंकू से संपर्क कर हार्ड डिस्क खरीदी थी। तीन महीने बाद हार्ड डिस्क खराब हो गई थी, जिसे वापस करने के लिए मिंकू से संपर्क किया था।
Thursday, November 8, 2018
7.3 इंच का मेन डिस्प्ले जिसे मोड़कर 4.6 इंच का किया जा सकेगा
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने न्यूयॉर्क में चल रही सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस (SDC 2018) में अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन पेश कर दिया। हालांकि, कंपनी ने अभी इसके नाम, इसकी कीमत और इसके स्पेसिफिकेशन को लेकर कोई खुलासा नहीं किया है। इसमें कंपनी ने 7.3 इंच का मेन डिस्प्ले दिया है, जिसे फोल्ड कर 4.6 इंच का किया जा सकता है।
वर्टिकली फोल्ड कर सकेंगे इसे : सैमसंग के फोल्डेबल स्मार्टफोन की सबसे खास बात ये है कि इसे वर्टिकली फोल्ड किया जा सकेगा। 7.3 इंच के डिस्प्ले का रेजोल्यूशन 1536X2152 है जबकि 4.6 इंच के डिस्प्ले का रेजोल्यूशन 840X1960 है।
एक बार में चला सकेंगे तीन ऐप्स : इस फोन में सैमसंग ने सिंगल यूआई (यूजर इंटरफेस) का इस्तेमाल किया है। सैमसंग के मुताबिक, एक ही यूआई होने की वजह से इस फोन में यूजर्स मल्टीटास्किंग आसानी से कर सकेंगे। सैमसंग का कहना है कि टैबलेट के रूप में इस्तेमाल करने पर एक बार में तीन ऐप्स को खोला जा सकेगा।
अगले साल ही लॉन्च होगा ये फोन : इस डेवलपर कॉन्फ्रेंस में सैमसंग ने सिर्फ अपने फोल्डेबल फोन की घोषणा ही की है और इसे अगले साल तक लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग अगले साल गैलेक्सी-सीरीज की 10वीं सालगिरह के मौके पर Galaxy S10 लॉन्च करने की तैयारी कर रही है और इस फोन की लॉन्चिंग के बाद ही फोल्डेबल फोन को लॉन्च किया जाएगा।
दुनिया का पहला फोल्डेबल फोन हो चुका है लॉन्च : पिछले हफ्ते अमेरिकी स्टार्ट-अप कंपनी Royole ने दुनिया का पहला स्मार्टफोन FlexPai लॉन्च कर दिया। इस फोन में भी 7.8 इंच का डिस्प्ले है, जिसे फोल्ड कर 4 इंच का फोन बनाया जा सकता है। इस फोन में 7nm स्नैपड्रैगन 8150 प्रोसेसर के साथ 8 जीबी तक रैम और 16+20 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है।
हाल ही में लॉन्च हुए iPhone XR और सैमसंग Galaxy Note 9 का यूट्यूबर फोनबफ ने स्पीड टेस्ट किया। इस टेस्ट में उन्होंने पाया कि सिर्फ 3 जीबी रैम वाला iPhone XR, 8 जीबी रैम के Galaxy Note 9 से ज्यादा तेजी से परफॉर्म करता है। इसका वीडियो उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर भी शेयर किया है। उनके मुताबिक, iPhone XR में Galaxy Note 9 के मुकाबले 15 सेकेंड ज्यादा तेजी से ऐप्स खुलती हैं।
कैसे किया टेस्ट?
दोनों फोन का स्पीड टेस्ट करने के लिए फोनबफ ने iPhone XR के 64 जीबी स्टोरेज वैरिएंट और Galaxy Note 9 के 512 जीबी स्टोरेज वैरिएंट को लिया।
इस टेस्ट में उन्होंने दोनों ही फोन में सबवे सर्फर, एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल, कैमरा ऐप, फ्लिप डाइविंग जैसी ऐप्स को खोला। पहले राउंड में iPhone XR में 15 सेकेंड जल्दी ऐप्स खुलीं, वहीं Galaxy Note 9 ने थोड़ा समय लिया।
वर्टिकली फोल्ड कर सकेंगे इसे : सैमसंग के फोल्डेबल स्मार्टफोन की सबसे खास बात ये है कि इसे वर्टिकली फोल्ड किया जा सकेगा। 7.3 इंच के डिस्प्ले का रेजोल्यूशन 1536X2152 है जबकि 4.6 इंच के डिस्प्ले का रेजोल्यूशन 840X1960 है।
एक बार में चला सकेंगे तीन ऐप्स : इस फोन में सैमसंग ने सिंगल यूआई (यूजर इंटरफेस) का इस्तेमाल किया है। सैमसंग के मुताबिक, एक ही यूआई होने की वजह से इस फोन में यूजर्स मल्टीटास्किंग आसानी से कर सकेंगे। सैमसंग का कहना है कि टैबलेट के रूप में इस्तेमाल करने पर एक बार में तीन ऐप्स को खोला जा सकेगा।
अगले साल ही लॉन्च होगा ये फोन : इस डेवलपर कॉन्फ्रेंस में सैमसंग ने सिर्फ अपने फोल्डेबल फोन की घोषणा ही की है और इसे अगले साल तक लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग अगले साल गैलेक्सी-सीरीज की 10वीं सालगिरह के मौके पर Galaxy S10 लॉन्च करने की तैयारी कर रही है और इस फोन की लॉन्चिंग के बाद ही फोल्डेबल फोन को लॉन्च किया जाएगा।
दुनिया का पहला फोल्डेबल फोन हो चुका है लॉन्च : पिछले हफ्ते अमेरिकी स्टार्ट-अप कंपनी Royole ने दुनिया का पहला स्मार्टफोन FlexPai लॉन्च कर दिया। इस फोन में भी 7.8 इंच का डिस्प्ले है, जिसे फोल्ड कर 4 इंच का फोन बनाया जा सकता है। इस फोन में 7nm स्नैपड्रैगन 8150 प्रोसेसर के साथ 8 जीबी तक रैम और 16+20 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है।
हाल ही में लॉन्च हुए iPhone XR और सैमसंग Galaxy Note 9 का यूट्यूबर फोनबफ ने स्पीड टेस्ट किया। इस टेस्ट में उन्होंने पाया कि सिर्फ 3 जीबी रैम वाला iPhone XR, 8 जीबी रैम के Galaxy Note 9 से ज्यादा तेजी से परफॉर्म करता है। इसका वीडियो उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर भी शेयर किया है। उनके मुताबिक, iPhone XR में Galaxy Note 9 के मुकाबले 15 सेकेंड ज्यादा तेजी से ऐप्स खुलती हैं।
कैसे किया टेस्ट?
दोनों फोन का स्पीड टेस्ट करने के लिए फोनबफ ने iPhone XR के 64 जीबी स्टोरेज वैरिएंट और Galaxy Note 9 के 512 जीबी स्टोरेज वैरिएंट को लिया।
इस टेस्ट में उन्होंने दोनों ही फोन में सबवे सर्फर, एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल, कैमरा ऐप, फ्लिप डाइविंग जैसी ऐप्स को खोला। पहले राउंड में iPhone XR में 15 सेकेंड जल्दी ऐप्स खुलीं, वहीं Galaxy Note 9 ने थोड़ा समय लिया।
Thursday, November 1, 2018
सरदार पटेल और मोदी में है कितनी समानता?
सरदार पटेल से भारतीय जनता पार्टी की सहानुभूति शुरू से रही है. ये सहानुभूति क्यों है, इसका जवाब कई इतिहासकार नेहरू बनाम पटेल की राजनीति के तौर पर देखते हैं.
ऐसा इसलिए क्योंकि सरदार पटेल भी कांग्रेस के ही नेता थे. सरदार पटेल ने गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए थे. पटेल ने ये भी कहा था कि गांधी की हत्या के बाद आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने मिठाई बाँटी थी.
इतना कुछ होने के बावजूद बीजेपी को सरदार पटेल क्यों लुभाते हैं?
नरेंद्र मोदी सरदार पटेल के गृह राज्य गुजरात के ही हैं और वो पटेल को लेकर काफ़ी मुखर रहते हैं. कई बार पटेल से सहानुभूति जताते हुए नेहरू पर हमला बोल चुके हैं. पीएम मोदी को जब भी नेहरू पर हमला बोलना होता है तो पटेल की तारीफ़ करते हुए बोलते हैं.
मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे. तारीख़ थी 20 अक्टूबर 2013. गुजरात में एक समारोह में मोदी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक साथ मंच पर थे. इसी मंच से मोदी ने कहा, ''हर भारतीयों के मन में आज तक कसक है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पटेल नहीं बने. अगर पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो भारत की तस्वीर कुछ और होती.''
मनमोहन सिंह ने उसी मंच से मोदी को जवाब दिया था, ''याद रखना चाहिए कि पटेल भी कांग्रेस के ही नेता थे.''
मोदी अब प्रधानमंत्री हैं और उन्होंने पटेल की ऐसी मूर्ति बनवाई जिससे दुनिया की सारी मूर्तियां छोटी पड़ गईं. लेकिन मोदी जिस पटेल को अपना आदर्श मानते हैं, उनके विचारों से कोई समानता भी है?
मोदी और पटेल के व्यक्तित्व, सोच और दृष्टिकोण में कितनी समानता है?
'मैं कम बोलने वाला आदमी हूं. मैं कम क्यों बोलता हूं? एक सूत्र है जो मैंने सीख लिया है कि मौनं मूर्खस्य भूषणम्. ज़्यादा बोलना अच्छा नहीं है. वो विद्वानों का काम है. लेकिन जो हम बोलें उसी के ऊपर हम न चल सकें तो हमारा बोलना नुकसान कर सकता है. इसलिए भी मैं कम बोलता हूं.'
सरदार पटेल की कही इस बात को यू-ट्यूब पर सुना जा सकता है.
पटेल बहुत ही मृदुभाषी थे. वो कम बोलते थे और करने में ज़्यादा यक़ीन रखते थे. पटेल ने कभी कोई विवादित बयान नहीं दिया. इस कसौटी पर पीएम मोदी को कसा जाए तो कई चीज़ें विषम दिखती हैं. पीएम मोदी के कई विवादित बयान हैं और वो लंबे भाषण देने के लिए जाने जाते हैं.
गांधीवादी विचारक कुमार प्रशांत कहते हैं, ''सरदार पटेल ठोस बात करते थे. वो लंबे भाषणों में बिल्कुल यक़ीन नहीं करते थे.''
एक तरफ सरदार पटेल मौनं मूर्खस्य भूषणम्की बात करते थे. लेकिन दूसरी तरफ पीएम मोदी अपने लंबे भाषणों के लिए जाने जाते रहे हैं.
ऐसे कई मौक़े रहे, जब मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों से लंबे भाषण दिए. लाल किले से दिए घंटों लंबे भाषण आपको याद ही होंगे.
इन भाषणों के दौरान मोदी से कुछ भूल भी होती रही हैं. तक्षशिला को बिहार का हिस्सा बताने से लेकर सिकंदर के बिहार आने की बात तक.... मोदी की ऐसी कई चूकें सोशल मीडिया पर चर्चा में रहीं.
मोदी भले ही नेहरू पर आक्रामक रहते हैं लेकिन पटेल उनका सम्मान करते थे. इसकी झलक उन ख़तों में मिलती है, जिसे इन दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को भेजा था.
एक अगस्त 1947
नेहरू ने पटेल को ख़त लिखा, "कुछ हद तक औपचारिकताएं निभाना ज़रूरी होने से मैं आपको मंत्रिमंडल में सम्मिलित होने का निमंत्रण देने के लिए लिख रहा हूँ. इस पत्र का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि आप तो मंत्रिमंडल के सुदृढ़ स्तंभ हैं."
3 अगस्त 1947
सरदार पटेल ने नेहरू को जवाब दिया, ''आपके 1 अगस्त के पत्र के लिए अनेक धन्यवाद. एक-दूसरे के प्रति हमारा जो अनुराग और प्रेम रहा है तथा लगभग 30 साल की हमारी जो अखंड मित्रता है, उसे देखते हुए औपचारिकता के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता. आशा है कि मेरी सेवाएं बाकी के जीवन के लिए आपके अधीन रहेंगी. आपको उस ध्येय की सिद्धि के लिए मेरी शुद्ध और संपूर्ण वफादारी औऱ निष्ठा प्राप्त होगी, जिसके लिए आपके जैसा त्याग और बलिदान भारत के अन्य किसी पुरुष ने नहीं किया है. हमारा सम्मिलन और संयोजन अटूट और अखंड है और उसी में हमारी शक्ति निहित है. आपने अपने पत्र में मेरे लिए जो भावनाएं व्यक्त की हैं, उसके लिए मैं आपका कृतज्ञ हूं.''
ऐसा इसलिए क्योंकि सरदार पटेल भी कांग्रेस के ही नेता थे. सरदार पटेल ने गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए थे. पटेल ने ये भी कहा था कि गांधी की हत्या के बाद आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने मिठाई बाँटी थी.
इतना कुछ होने के बावजूद बीजेपी को सरदार पटेल क्यों लुभाते हैं?
नरेंद्र मोदी सरदार पटेल के गृह राज्य गुजरात के ही हैं और वो पटेल को लेकर काफ़ी मुखर रहते हैं. कई बार पटेल से सहानुभूति जताते हुए नेहरू पर हमला बोल चुके हैं. पीएम मोदी को जब भी नेहरू पर हमला बोलना होता है तो पटेल की तारीफ़ करते हुए बोलते हैं.
मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे. तारीख़ थी 20 अक्टूबर 2013. गुजरात में एक समारोह में मोदी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक साथ मंच पर थे. इसी मंच से मोदी ने कहा, ''हर भारतीयों के मन में आज तक कसक है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पटेल नहीं बने. अगर पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो भारत की तस्वीर कुछ और होती.''
मनमोहन सिंह ने उसी मंच से मोदी को जवाब दिया था, ''याद रखना चाहिए कि पटेल भी कांग्रेस के ही नेता थे.''
मोदी अब प्रधानमंत्री हैं और उन्होंने पटेल की ऐसी मूर्ति बनवाई जिससे दुनिया की सारी मूर्तियां छोटी पड़ गईं. लेकिन मोदी जिस पटेल को अपना आदर्श मानते हैं, उनके विचारों से कोई समानता भी है?
मोदी और पटेल के व्यक्तित्व, सोच और दृष्टिकोण में कितनी समानता है?
'मैं कम बोलने वाला आदमी हूं. मैं कम क्यों बोलता हूं? एक सूत्र है जो मैंने सीख लिया है कि मौनं मूर्खस्य भूषणम्. ज़्यादा बोलना अच्छा नहीं है. वो विद्वानों का काम है. लेकिन जो हम बोलें उसी के ऊपर हम न चल सकें तो हमारा बोलना नुकसान कर सकता है. इसलिए भी मैं कम बोलता हूं.'
सरदार पटेल की कही इस बात को यू-ट्यूब पर सुना जा सकता है.
पटेल बहुत ही मृदुभाषी थे. वो कम बोलते थे और करने में ज़्यादा यक़ीन रखते थे. पटेल ने कभी कोई विवादित बयान नहीं दिया. इस कसौटी पर पीएम मोदी को कसा जाए तो कई चीज़ें विषम दिखती हैं. पीएम मोदी के कई विवादित बयान हैं और वो लंबे भाषण देने के लिए जाने जाते हैं.
गांधीवादी विचारक कुमार प्रशांत कहते हैं, ''सरदार पटेल ठोस बात करते थे. वो लंबे भाषणों में बिल्कुल यक़ीन नहीं करते थे.''
एक तरफ सरदार पटेल मौनं मूर्खस्य भूषणम्की बात करते थे. लेकिन दूसरी तरफ पीएम मोदी अपने लंबे भाषणों के लिए जाने जाते रहे हैं.
ऐसे कई मौक़े रहे, जब मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों से लंबे भाषण दिए. लाल किले से दिए घंटों लंबे भाषण आपको याद ही होंगे.
इन भाषणों के दौरान मोदी से कुछ भूल भी होती रही हैं. तक्षशिला को बिहार का हिस्सा बताने से लेकर सिकंदर के बिहार आने की बात तक.... मोदी की ऐसी कई चूकें सोशल मीडिया पर चर्चा में रहीं.
मोदी भले ही नेहरू पर आक्रामक रहते हैं लेकिन पटेल उनका सम्मान करते थे. इसकी झलक उन ख़तों में मिलती है, जिसे इन दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को भेजा था.
एक अगस्त 1947
नेहरू ने पटेल को ख़त लिखा, "कुछ हद तक औपचारिकताएं निभाना ज़रूरी होने से मैं आपको मंत्रिमंडल में सम्मिलित होने का निमंत्रण देने के लिए लिख रहा हूँ. इस पत्र का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि आप तो मंत्रिमंडल के सुदृढ़ स्तंभ हैं."
3 अगस्त 1947
सरदार पटेल ने नेहरू को जवाब दिया, ''आपके 1 अगस्त के पत्र के लिए अनेक धन्यवाद. एक-दूसरे के प्रति हमारा जो अनुराग और प्रेम रहा है तथा लगभग 30 साल की हमारी जो अखंड मित्रता है, उसे देखते हुए औपचारिकता के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता. आशा है कि मेरी सेवाएं बाकी के जीवन के लिए आपके अधीन रहेंगी. आपको उस ध्येय की सिद्धि के लिए मेरी शुद्ध और संपूर्ण वफादारी औऱ निष्ठा प्राप्त होगी, जिसके लिए आपके जैसा त्याग और बलिदान भारत के अन्य किसी पुरुष ने नहीं किया है. हमारा सम्मिलन और संयोजन अटूट और अखंड है और उसी में हमारी शक्ति निहित है. आपने अपने पत्र में मेरे लिए जो भावनाएं व्यक्त की हैं, उसके लिए मैं आपका कृतज्ञ हूं.''
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